"यदि कोई सेवा मुफ्त है, तो आप स्वयं उत्पाद हैं" — तकनीक की दुनिया का यह नियम हमारे संस्कारों पर लागू नहीं होता। वंशलेखन कोई व्यापार नहीं, बल्कि पितृ-ऋण से मुक्ति और अपनी जड़ों को सहेजने का एक पवित्र मार्ग है।
धरोहर का व्यवसायीकरण क्यों असंभव है?
भारत के विभिन्न क्षेत्रों में वंशावली लेखन की समृद्ध परंपरा रही है—चाहे वह मिथिला के 'पंजीकार' हों, हरिद्वार-कुरुक्षेत्र के 'पंडा', या राजस्थान के 'राव-भाट'। ये बही-खाते हमारी कुलदेवी, गोत्र, प्रवर और सात-पुश्तों के इतिहास को संजोते हैं। इस पवित्र डेटा को बेचना या इस पर विज्ञापन दिखाना हमारे पूर्वजों के अपमान के समान है। हम आपके परिवार की जानकारी को कभी भी किसी तीसरे पक्ष को नहीं बेचेंगे और न ही यहाँ कोई विज्ञापन दिखाएंगे।
डेटा सुरक्षा और विज्ञापन-मुक्त प्रतिबद्धता
हम शपथ लेते हैं कि आपके वंशवृक्ष पर कोई अवांछित विज्ञापन नहीं दिखाया जाएगा और न ही आपके पारिवारिक डेटा का उपयोग किसी भी प्रकार के लक्षित विज्ञापनों (Targeted Ads) के लिए किया जाएगा। आपका इतिहास केवल आपका है।
फिर इसके संचालन का खर्च कैसे निकलता है?
सर्वर होस्टिंग, डेटाबेस सुरक्षा और तकनीकी विकास में वास्तविक खर्च आता है। हम इस खर्च को वहन करने के लिए एक पारदर्शी और समुदाय-आधारित मॉडल का उपयोग करते हैं, न कि आपके डेटा का सौदा करके।
स्वैच्छिक योगदान (Voluntary Contributions)
जो परिवार सक्षम हैं, वे सर्वर के रखरखाव के लिए स्वेच्छा से दान करते हैं। यह मॉडल विकिपीडिया की तरह काम करता है।
प्रीमियम हेरिटेज प्रिंट्स (Premium Heritage Prints)
यदि आप अपने विशाल वंशवृक्ष को पारंपरिक सिल्क स्क्रॉल या भव्य कैनवास चार्ट पर मुद्रित करवाना चाहते हैं, तो हम इसके लिए सशुल्क सेवा प्रदान करते हैं।
संस्थागत अनुदान (Institutional Grants)
सांस्कृतिक संरक्षण के लिए समर्पित गैर-लाभकारी संस्थाओं और सांस्कृतिक मंत्रालयों से सहायता प्राप्त करना।
पारंपरिक और आधुनिक वंशावली प्रणालियों की तुलना
| विशेषता | पारंपरिक पंडा/पंजी प्रथा | पश्चिमी व्यावसायिक साइट्स | वंश वृक्ष (Vansh Vriksha) |
|---|---|---|---|
| पहुंच और सुलभता | भौगोलिक रूप से सीमित (हरिद्वार/मिथिला) | सशुल्क सब्सक्रिप्शन के पीछे बंद | वैश्विक रूप से मुफ्त और सुलभ |
| डेटा स्वामित्व | पंजीकारों/पंडों के पास सुरक्षित | कंपनी के पास व्यावसायिक अधिकार | पूर्णतः आपका अपना (एक्सपोर्ट योग्य) |
| सांस्कृतिक अनुकूलन | उच्च (गोत्र/शाखा आधारित) | शून्य (पश्चिमी पारिवारिक ढांचा) | पूर्णतः भारतीय (कुलदेवी, पिंड-दान, उपनाम) |
| गोपनीयता | सीमित लोगों तक | डेटा माइनिंग का खतरा | विज्ञापन-मुक्त, पूर्ण एन्क्रिप्शन |
सात-पुश्तों का संचय और प्रवासी भारतीयों की पुकार
मॉरीशस, सूरीनाम, फिजी या अमेरिका में बसी भारतीय पीढ़ी आज अपनी जड़ों से कटी महसूस करती है। मिथिला की पंजी प्रथा हो या केरल के पारिवारिक 'थारवाड़' का इतिहास, इन्हें डिजिटल रूप से सहेजना अब अनिवार्य हो चुका है। हमारा मंच बिना किसी आर्थिक बाधा के, सात पीढ़ियों (सात-पुश्त) के इतिहास को जोड़ने का माध्यम बनता है ताकि आने वाली संतति श्राद्ध और तर्पण के समय अपने पुरखों को नाम से स्मरण कर सके।
जड़ों के बिना वृक्ष केवल सूखी लकड़ी है। अपनी सात पीढ़ियों को जानना केवल इतिहास जानना नहीं, बल्कि अपनी पहचान के अस्तित्व को स्वीकार करना है।
- ओपन-सोर्स आर्किटेक्चर: हमारा कोड पारदर्शी है ताकि भविष्य में कोई भी इसे बंद या एकाधिकार में न ले सके।
- डेटा पोर्टेबिलिटी: आप जब चाहें अपना पूरा वंशवृक्ष GEDCOM या PDF प्रारूप में मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं।
- कोई छुपा हुआ शुल्क नहीं: मूल वंशवृक्ष निर्माता के सभी फीचर्स हमेशा के लिए मुफ्त रहेंगे।